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Kesari Movie Review in Hindi

Posted 2019/03/23 1298 1

इस फ़िल्म के बारे में कुछ भी लिखने से पहले ये क्लियर कर दूँ कि ट्रेलर में दिखाई गयी परिणिति असल फ़िल्म में साक्षात नहीं है।
डायरेक्टर – अनुराग सिंह (पंजाबी फिल्मों के मशहूर)
प्रोडक्शन – धर्मा प्रोडक्शन, अज़ुरे एंटरटेनमेंट, ज़ी स्टूडियो
राइटर – गिरीश कोहली और अनुराग सिंह
सिनेमेटोग्राफी – अंशुल चौबे
एडिटर – मनीष मोरे
कॉस्टयूम – शीतल शर्मा
म्यूजिक BGM – राजू सिंह (गानों में) तनिष्क बागची, आर्को प्रावो मुखर्जी, चितरंजन भट्ट, जसबीर जस्सी, जसलीन रॉयल और गुरमोह

#कहानी जैसे विख्यात है ही, वही रखी गयी है। हवलदार ईशर सिंह (अक्षय कुमार) का अपने सीनियर की बात न मानने के कारण ट्रान्सफर हो जाता है और वो आ जाता है किला सारागढ़ी में। यहाँ कभी कोई हमला नहीं होता इसलिए 36 सिख रेजिमेंट (जो आज भी है) के 21 सिख जवान यहाँ डाकिये की तरह इधर से उधर मेसेज पहुँचाने के काम आते हैं। इस वजह से यहाँ डिसिप्लिन नामक कोई चीज़ बाकी नहीं रह जाती। ईशर सिंह इन्हें सुधारता ही है कि आठ से दस हज़ार के करीब पठान आक्रमणकारी आ धमकते हैं और एतिहासिक युद्ध शुरु हो जाता है।

#स्क्रिप्ट बहुत कसी हुई है। जैसा की असल में भी होता है कि सिखों/पंजाबियों का मरते दम तक ह्यूमर नहीं जाता। बीच-बीच में हंसी मज़ाक के ऐसे पल भी दिए हैं कि पब्लिक पैनिक न होने पाए। कोई लम्बा ड्रीम सिक्वेंस गाना या वॉर सोंग पिक्चराइज़ नहीं है जो कंटीन्यूटी तोड़े। ईशर सिंह की पत्नी बनी जिवानी (परिणिति) भी सिर्फ़ फ़्लैश-बैक और यादों के रूप में ही दिखाई हैं जो वाकई काबिल-ए-तारीफ़ है। हाँ, ढोल उस किले में कहाँ से आया ये वाजिब सवाल हो सकता है। बाकी कुछ मसाले तो हैं ही

#डायरेक्शन उम्दा है, स्क्रिप्ट का साथ देता है, पर यहाँ भाषा के देसी टच की कमी खलती है, इसकी वजह शायद पूरे भारत में फ़िल्म समझ आए यही होगी। इसके इतर तख्ते पर हिंदी में लिखे नामों की वजह समझ नहीं आती, अग्रेज़ी हुकूमत के दौरान सिख क्या आधा भारत उर्दू में लिखता पढ़ता था। बादबाकी सब अच्छा है। आखिरी का एक घंटा तो आँखों में आंसू ला दे ऐसा है।

#एक्टिंग तो अक्षय कुमार बढ़िया करते ही हैं, वो इस रोल को जी गये हैं। बस उन्हें ठेठ पंजाबी बोलने को कहा जाता तो रंग और निखर आता। उनके इतर 21 सिखों की एक्टिंग भी लाजवाब है। वंश भारद्वाज, राकेश शर्मा, सुविंदर विकी, विवेक सैनी, राजवीर सिंह धालीवाल, गुरप्रीत टोटी, आदि की एक्टिंग तो लाजवाब है ही, डायरेक्टर अनुराग सिंह ने इनके रोल को फुटेज भी दी है। ऐसा नहीं है कि सारा फोकस हीरो पर ही है और बाकी कौन कहाँ मर रहा है कुछ नहीं पता, नहीं! सबकी हाज़िरी दिल को छू लेने वाली है। छोटे सुमीत सिंह का आख़िरी सीन आपको हिला के रख देने में सक्षम है। अक्षय के इतर बाकियों की डायलॉग डिलीवरी ज़्यादा नैचुरल है।

#म्यूजिक बैकग्राउंड में भरपूर साथ देता है। हर फ़िल्म की बैकबोन होता है BGM और केसरी की बैकबोन मजबूत है। ‘तेरी मिट्टी’, ‘वे माही’ गाने बैकग्राउंड में हैं और कर्णप्रिय भी। जसलीन रॉयल की आवाज में दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की लिखी चंडिका चरित्र (देह सिवा) बहुत एनेर्जेटिक है। जसलीन ने अपने अंदाज़ में स्लो टेम्पो और बीट पर गाया है लेकिन वो असरदार है।

#सिनेमाटोग्राफी शानदार है। किले से होते हमले हो या अक्षय की ग्राउंड बैटल, कैमरा वर्क लाजवाब है।

#कॉस्टयूम और #लोकेशन दोनों बहुत ज़बरदस्त हैं। फ़िल्म उस दौर की वाकई लगती है। सेट बहुत शानदार है, किला हालाँकि छोटा है पर छोटी-छोटी डिटेलिंग पर ख़ासा ध्यान दिया गया है।

#एडिटिंग में और कुछ नहीं तो 10 मिनट कम किए जा सकते थे, फिर भी फ़िल्म खलती नहीं।
कुलमिलाकर फ़िल्म में वो सब कुछ है जो एक वॉर फ़िल्म में होना चाहिए। भारी मात्रा में एक्शन, ढेर सारा इमोशन, अपनी आँखों से डराते अक्षय और ह्यूमर करते सब। फ़िल्म कम्पलीट पैकेज है। इसके इतर सीरियस होने पर सिख जवानों की बहादुरी की बेहतरीन गाथा है। फ़िल्म ऐसी है कि आप इंडियन क्लासिक वॉर फ़िल्म बॉर्डर को याद किए बगैर नहीं रह पाओगे। अक्षय और सनी देओल की कहीं कोई तुलना नहीं है पर अक्षय ने भी फ़िल्म या एक्शन/इमोशन कहीं हल्का नहीं पड़ने दिया।
देखने की वजह – इतिहास को पढ़ने के बाद विसुअल्स भी चाहते हैं तो, अच्छी एक्टिंग और एक्शन पसंद है तो, अक्षय के फैन हैं तो यकीनन।
न देखने का बहाना – वॉर / हिस्ट्री फ़िल्म में बॉलीवुड के मसाला फार्मूला से घबराते हैं तो, और कोई नहीं।
देह शिवा बर मोहे ईहे, शुभ कर्मन ते कभुं न टरूं
न डरौं अरि सौं जब जाय लड़ौं, निश्चय कर अपनी जीत करौं,
अरु सिख हों आपने ही मन कौ इह लालच हउ गुन तउ उचरों,
जब आव की अउध निदान बनै अति ही रन मै तब जूझ मरों |शबद| गुरु गोबिंद सिंह जी

#रेटिंग – 8/10*
#सहर

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Comments

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1 Comment

Harpreet singh

at 4:19 pm

bhut Vadiya movies